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एपिसोड 1 -आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा कबाड़ का कारोबार? अब सरकारी किताबों पर भी कबाड़ियों की नजर, बड़े स्कूलों से खरीदने का आरोप..!

अभिषेक धमतरी-- शहर में इन दिनों कबाड़ का कारोबार तेजी से पैर पसारता नजर आ रहा है।गली-मोहल्लों से लेकर शहर के अलग-अलग इलाकों में कबाड़ियों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।लेकिन अब इस कारोबार को लेकर एक ऐसा सवाल खड़ा हो गया है,जिस पर जिम्मेदारों को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।

बताया जा रहा है कि कबाड़ का कारोबार करने वाले कुछ लोग अब पुराने लोहे, प्लास्टिक और अन्य कबाड़ सामान तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि सरकारी पुस्तकों तक की खरीदी-बिक्री का मामला सामने आ रहा है। आरोप है कि बड़े स्कूलों से निकलने वाली सरकारी किताबें भी कबाड़ी तक पहुंच रही हैं और इन्हें कबाड़ के रूप में खरीदा जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्कूलों से सरकारी पुस्तकें कबाड़ियों तक पहुंच कैसे रही हैं? पुस्तकें स्कूल में विद्यार्थियों के उपयोग के लिए उपलब्ध कराई गई थीं,तो इनके कबाड़ में पहुंचने की पूरी प्रक्रिया की जांच होना जरूरी है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कबाड़ कारोबारियों को आखिर किसका संरक्षण हासिल है, जिसके चलते उनका कारोबार बेखौफ तरीके से चल रहा है।हालांकि इन चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है,लेकिन यदि सरकारी पुस्तकों की खरीदी वास्तव में कबाड़ के रूप में की जा रही है,तो मामला केवल कबाड़ के कारोबार का नहीं बल्कि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग से भी जुड़ सकता है।

जांच का विषय यह भी है कि स्कूलों से किताबें कबाड़ में बेचने की अनुमति किसने दी, किताबें कबाड़ी तक कैसे पहुंचीं और इसके एवज में किसे भुगतान किया गया। यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई है, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई भी होनी चाहिए।

शहर में कबाड़ के कारोबार को लेकर पहले भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं,ऐसे में अब सरकारी पुस्तकों के कबाड़ में पहुंचने की खबर ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

जरूरत है कि शिक्षा विभाग और संबंधित अधिकारी इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएं और यह पता लगाएं कि सरकारी स्कूलों से निकलने वाली किताबें आखिर कबाड़ियों तक कैसे पहुंच रही हैं,अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो सरकारी पुस्तकों को कबाड़ में पहुंचाने वालों के साथ-साथ उन्हें खरीदने वालों की भूमिका भी सामने आनी चाहिए।

सवाल सीधा है — सरकारी किताबें कबाड़ी की दुकान तक पहुंचीं कैसे और इस पूरे खेल के पीछे कौन है?
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